प्रोटोटाइप से प्रोडक्शन तक: एआई एजेंट्स की वो 4 सच्चाईयाँ जो कोई नहीं बताता
प्रोटोटाइप से प्रोडक्शन तक: एआई एजेंट्स की वो 4 सच्चाईयाँ जो कोई नहीं बताता 1. परिचय एआई एजेंट बनाना अब मिनटों का खेल है। कुछ ही लाइन्स के कोड से एक ऐसा प्रोटोटाइप तैयार हो जाता है जो शानदार डेमो देता है। लेकिन इस उत्साह के बीच एक बड़ी और अक्सर नज़रअंदाज़ की जाने वाली खाई है—जिसे हम "लास्ट माइल प्रोडक्शन गैप" कहते हैं। असली चुनौती एक आकर्षक डेमो बनाने में नहीं, बल्कि उसे एक ऐसे भरोसेमंद और मज़बूत प्रोडक्शन सिस्टम में बदलने में है जिस पर आपका बिज़नेस निर्भर कर सके। यहाँ बताई गई चार सच्चाईयाँ सिर्फ तथ्य नहीं हैं, बल्कि एक नए और आवश्यक अनुशासन, 'एजेंटऑप्स' (AgentOps) के मूलभूत सिद्धांत हैं। एक एजेंट बनाना आसान है। उस पर भरोसा करना मुश्किल है। 2. एआई एजेंट्स की 4 चौंकाने वाली सच्चाईयाँ 2.1. पहला सच: 80% काम 'स्मार्टनेस' का नहीं, बल्कि 'पाइपलाइन' का है एजेंट डेवलपमेंट का 80/20 नियम शायद आपको हैरान कर दे। लगभग 80% मेहनत एजेंट के कोर लॉजिक या प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग पर नहीं, बल्कि उस बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और वैलिडेशन पर खर्च होती है जो उसे भरोसेमंद और सुरक्षित बना...