Talking to strangers book review summary and explanation
अजनबियों को समझने में हम इतने बुरे क्यों हैं? 3 चौंकाने वाले सच जो आपकी सोच बदल देंगे क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाक़ात की है जिसके बारे में आपको लगा हो कि आप उसे जानते हैं, लेकिन बाद में पता चला कि आपका अंदाज़ा पूरी तरह से गलत था? हम सब इस अनुभव से गुज़रते हैं। किसी अजनबी के इरादों, भावनाओं और सच्चाई को समझना बेहद मुश्किल क्यों है? मैल्कम ग्लैडवेल अपनी अभूतपूर्व किताब टॉकिंग टू स्ट्रेंजर्स ( Talking to Strangers ) में इसी जटिल समस्या की गहराई से पड़ताल करते हैं। वह सैंड्रा ब्लैंड के दुखद मामले से शुरुआत करते हैं, जिनकी ऑफिसर ब्रायन एन्सिनिया के साथ एक साधारण ट्रैफिक स्टॉप पर हुई मुलाक़ात एक विनाशकारी घटना में बदल गई। यह मामला इस बात का एक शक्तिशाली उदाहरण है कि कैसे अजनबियों के साथ हमारी बातचीत, बुनियादी गलतफहमियों के कारण, भयावह रूप ले सकती है। ग्लैडवेल तर्क देते हैं कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि यह उन तीन घातक गलतियों का परिणाम थी जो हम सब करते हैं: हम सच पर आँख मूँदकर भरोसा करते हैं, हम मानते हैं कि हम किसी के चेहरे को पढ़ सकते हैं, और हम उस व्यक्ति के संदर्भ को पूरी तर...