How to stop worrying and start living book summary, explanation and review
चिंता करना छोड़ें: 1948 की एक किताब के 5 आश्चर्यजनक रहस्य जो आज भी कारगर हैं चिंता करना हम सबकी आदत है। यह एक ऐसी सार्वभौमिक मानवीय आदत है जो हमारी खुशी चुरा लेती है, हमारी ऊर्जा खत्म कर देती है, और हमें वर्तमान में पूरी तरह से जीने से रोकती है। लेकिन क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि हमारी अधिकांश चिंताएँ पूरी तरह से व्यर्थ हैं? अब, इस पर एक पल के लिए विचार करें। शोध आश्चर्यजनक रूप से कुछ और ही कहते हैं: जिन चीजों के बारे में हम चिंता करते हैं, उनमें से 40% कभी होती ही नहीं हैं, 30% अतीत के बारे में होती हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता, और केवल 8% चिंताएं ही वास्तव में उन समस्याओं से संबंधित होती हैं जो सच होती हैं। इसका मतलब है कि हमारी 92% चिंताएँ या तो काल्पनिक हैं या उन चीजों के बारे में हैं जिन्हें हम नियंत्रित नहीं कर सकते। इस समस्या का एक कालातीत समाधान डेल कार्नेगी की क्लासिक पुस्तक, "हाउ टू स्टॉप वरीइंग एंड स्टार्ट लिविंग" ( How to Stop Worrying and Start Living ) में मिलता है, जो पहली बार 1948 में प्रकाशित हुई थी। यह पुस्तक चिंता पर काबू पाने के लिए व्यावहारिक ज्ञान क...