Lateral Thinking by Edward de Bono: Complete Summary, Key Ideas, Techniques & Lessons
दिमाग की पुरानी लीक को कैसे तोड़ें? लेटरल थिंकिंग और एडवर्ड डी बोनो के क्रांतिकारी (और विवादित) विचार कभी आपने महसूस किया है कि आप किसी समस्या के समाधान के लिए जी-जान लगा रहे हैं, लेकिन परिणाम वही 'ढाक के तीन पात' वाला है? हमारी स्कूलिंग ने हमारे दिमाग को एक 'लॉजिकल ट्रैक' पर दौड़ना तो बखूबी सिखा दिया है, लेकिन नए ट्रैक बनाना नहीं सिखाया। हम अक्सर एक ही गड्ढे को और गहरा खोदते रहते हैं, यह उम्मीद करते हुए कि गहराई में खजाना मिलेगा। लेकिन एडवर्ड डी बोनो ( Edward de Bono ) कहते हैं: "अगर खजाना कहीं और है, तो गड्ढे को और गहरा खोदने से कुछ हासिल नहीं होगा। आपको फावड़ा उठाकर नई जगह खुदाई शुरू करनी होगी।" यही 'लेटरल थिंकिंग' ( Lateral Thinking - पार्श्व चिंतन) का मूल मंत्र है। यह कोई जादुई प्रेरणा नहीं, बल्कि एक 'मेंटल रिवायरिंग' है जो हमें तर्क की सीमाओं से बाहर ले जाती है। 1. वर्टिकल बनाम लेटरल थिंकिंग—क्या आप गलत जगह गड्ढा खोद रहे हैं? डी बोनो के अनुसार, पारंपरिक सोच यानी 'वर्टिकल थिंकिंग' (लंबवत चिंतन) चयनात्मक है, जबकि लेटरल थिंकिंग सृ...