Frank Rosenblatt's Perceptron: The 1958 Invention That Quietly Built the AI Future
फ्रैंक रोसेनब्लैट: वो जीनियस जिसने 1958 में AI का भविष्य लिखा, और फिर भुला दिया गया परिचय: आधुनिक मशीन में छिपा भूत आज हम सब ChatGPT जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से घिरे हुए हैं। यह हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन इस आधुनिक मशीन के अंदर एक पुराना भूत छिपा है—एक ऐसा विचार जो दशकों पहले मर गया था, पर आज हमारी सबसे नई तकनीक को चला रहा है। क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि आज के AI के पीछे का मुख्य विचार 1958 में एक भूले-बिसरे जीनियस द्वारा खोजा गया था, जिसके काम को दशकों तक दफ़ना दिया गया? यह कहानी फ्रैंक रोसेनब्लैट की है, जिनकी सोच एक ऐसे भूत की तरह है जो अपनी मौत के कई साल बाद आख़िरकार सच साबित हो रही है। यह लेख उस क्रांति के पीछे के पाँच आश्चर्यजनक सत्यों को उजागर करेगा जिसने हमारी दुनिया को हमेशा के लिए बदल दिया। 1. डीप लर्निंग का जनक यह सोचकर मर गया कि वह असफल हो गया था फ्रैंक रोसेनब्लैट, एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक, को "डीप लर्निंग का जनक" कहा जाता है। उन्होंने परसेप्ट्रॉन ( Perceptron ) का आविष्कार किया—एक इलेक्ट्रॉनिक मस्तिष्क जो जैविक सिद्धांतों पर आधारित था और...