सिर्फ़ तेज़ नहीं, अब भरोसेमंद भी: गूगल ने पेश किया 'सत्यापनीय क्वांटम एडवांटेज
सिर्फ़ तेज़ नहीं, अब भरोसेमंद भी: गूगल ने पेश किया 'सत्यापनीय क्वांटम एडवांटेज'
क्वांटम कंप्यूटिंग की दुनिया अक्सर जटिल और प्रचार से भरी लगती है। बड़ी-बड़ी घोषणाएँ होती हैं जो भविष्य में क्रांति लाने का वादा करती हैं, लेकिन उन्हें समझना मुश्किल हो सकता है। हालाँकि, हाल ही में गूगल ने एक ऐसी सफलता की घोषणा की है जो पिछले दावों से अलग है। यह सफलता केवल गति के बारे में नहीं है, बल्कि एक सत्यापनीय (verifiable), यानी भरोसेमंद और दोहराए जाने योग्य उत्तर पाने के बारे में है, जो इस तकनीक को वास्तविक दुनिया के उपयोग के एक कदम और करीब लाता है।
2019 में, गूगल ने "क्वांटम सुप्रीमेसी" का दावा किया था, जिसका मतलब था कि एक क्वांटम कंप्यूटर कोई काम क्लासिकल सुपरकंप्यूटर से तेज़ कर सकता है। लेकिन अब, कंपनी "क्वांटम एडवांटेज" की बात कर रही है—यह एक ज़्यादा परिपक्व दावा है जो न केवल गति पर, बल्कि एक उपयोगी और भरोसेमंद परिणाम देने पर केंद्रित है। यह बदलाव इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतीक है।
इस सफलता के केंद्र में गूगल के क्वांटम एआई (Quantum AI) टीम द्वारा विकसित "क्वांटम इकोस" (Quantum Echoes) नामक एक नया एल्गोरिथ्म है। यह एल्गोरिथ्म क्वांटम कंप्यूटरों को केवल एक अकादमिक अभ्यास होने से आगे बढ़कर विज्ञान और उद्योग में व्यावहारिक समस्याओं को हल करने के लिए एक उपकरण बनने का मार्ग प्रशस्त करता है। आइए इस सफलता के पाँच प्रमुख पहलुओं को समझते हैं।
मुख्य बात 1: यह सिर्फ़ तेज़ नहीं, बल्कि "सत्यापनीय" है
एक "सत्यापनीय" परिणाम का महत्व बहुत बड़ा है, और यही इस घोषणा को 2019 के दावे से अलग करता है। उस समय, गूगल ने यह तो दिखाया कि एक क्वांटम कंप्यूटर किसी क्लासिकल सुपरकंप्यूटर से तेज़ गणना कर सकता है, लेकिन उसने जो परिणाम दिए वे रैंडम बिटस्ट्रिंग थे। इनकी व्यावहारिक उपयोगिता लगभग शून्य थी क्योंकि एक बड़े क्वांटम सिस्टम में वही बिटस्ट्रिंग कभी भी दो बार नहीं आती। वे तेज़ थे, लेकिन प्रभावी रूप से बेकार थे।
इसके विपरीत, नवीनतम सफलता एक ऐसा परिणाम देती है जिसे उसी क्षमता वाले दूसरे क्वांटम कंप्यूटर पर दोहराकर वही जवाब पाया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि विज्ञान पुनरुत्पादन (reproducibility) पर निर्भर करता है। सत्यापनीय परिणामों के बिना, क्वांटम कंप्यूटर अलग-थलग नवीनताएँ बने रहेंगे, न कि सहयोगी वैश्विक अनुसंधान के लिए विश्वसनीय उपकरण। यह क्वांटम कंप्यूटरों को वैज्ञानिक समस्याओं के लिए व्यावहारिक उपकरण बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
मुख्य बात 2: इसका रहस्य एक "क्वांटम इको" है
इस सफलता के केंद्र में "क्वांटम इकोस" एल्गोरिथ्म है, जिसे तकनीकी रूप से आउट-ऑफ-टाइम-ऑर्डर कोरिलेटर्स (OTOC) मापना कहा जाता है। इसे सरल शब्दों में समझने के लिए, एक अंधेरी गुफा का नक्शा बनाने के लिए गूँज (echoes) का उपयोग करने की कल्पना करें। गूगल की टीम ने अपने विलो (Willow) चिप पर इसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया।
यह प्रक्रिया कुछ इस तरह काम करती है:
- क्वांटम ऑपरेशनों की एक श्रृंखला को आगे की दिशा में चलाया जाता है।
- फिर, एक सिंगल क्यूबिट (क्वांटम बिट) में एक छोटा सा "विक्षोभ" (perturbation) डाला जाता है।
- इसके बाद, उन्हीं ऑपरेशनों को उल्टी दिशा में चलाया जाता है ताकि उस विक्षोभ की "गूँज" को मापा जा सके।
यह प्रक्रिया "रचनात्मक हस्तक्षेप" (constructive interference) नामक एक घटना का उपयोग करती है, जहाँ क्वांटम तरंगें जुड़कर मजबूत हो जाती हैं। यह सिग्नल को बढ़ाता है, जिससे माप अविश्वसनीय रूप से संवेदनशील हो जाता है और सिस्टम के भीतर सूक्ष्म क्वांटम लिंक का पता चलता है।
मुख्य बात 3: पहला लक्ष्य एक "आणविक रूलर" है
इस तकनीक का सबसे आशाजनक निकट-अवधि का अनुप्रयोग अणुओं की संरचना का निर्धारण करने के लिए है, जिसे हैमिल्टनियन लर्निंग (Hamiltonian learning) कहा जाता है। यह एल्गोरिथ्म न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (NMR) के साथ मिलकर काम कर सकता है—वही तकनीक जो एमआरआई (MRI) मशीनों में उपयोग होती है।
यह एल्गोरिथ्म एक "आणविक रूलर" की तरह काम करता है, जो अणुओं के भीतर उन परमाणुओं के बीच लंबी दूरी की अंतःक्रियाओं का पता लगा सकता है जिन्हें NMR अकेले नहीं माप सकता। लेकिन यह जानकारी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? इस précision से नई दवाओं की खोज में तेजी आ सकती है, यह मॉडल करके कि वे प्रोटीन से कैसे जुड़ती हैं, या यह बैटरी और सौर पैनलों के लिए नई सामग्री का आविष्कार करने में मदद कर सकती है, उनकी आणविक वास्तुकला को अभूतपूर्व विस्तार से प्रकट करके।
अपने सार्वजनिक घोषणापत्र में, गूगल ने इस क्षमता के भविष्य को रेखांकित करते हुए कहा:
"जिस तरह टेलीस्कोप और माइक्रोस्कोप ने नई, अनदेखी दुनियाओं के द्वार खोले, उसी तरह यह प्रयोग एक 'क्वांटम-स्कोप' की दिशा में एक कदम है जो पहले से न देखी जा सकने वाली प्राकृतिक घटनाओं को मापने में सक्षम होगा।"
मुख्य बात 4: गति आश्चर्यजनक है (लेकिन एक पेंच है)
गूगल द्वारा किए गए प्रदर्शन के दावे प्रभावशाली हैं। एक कार्य जिसे विलो क्वांटम चिप पर पूरा करने में लगभग 2 घंटे लगे, अनुमान है कि उसे एक क्लासिकल सुपरकंप्यूटर पर 13,000 गुना अधिक समय लगेगा। जबकि गति प्रभावशाली है, यह इस गति की सत्यापनीयता है जो इसे 2019 के प्रदर्शन से वास्तव में अलग करती है।
इससे भी अधिक चौंकाने वाला आँकड़ा यह है कि विलो डिवाइस पर मापे गए दूसरे क्रम के OTOC मानों के एक सेट के प्रत्येक डेटा पॉइंट का अनुकरण करने के लिए दुनिया के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटरों में से एक, फ्रंटियर (Frontier) पर 3.2 साल लगने का अनुमान है। यह प्रयोग विलो चिप के 105 में से 65 क्यूबिट्स का उपयोग करके किया गया था। इस दावे को पुख्ता करने के लिए, गूगल की टीम ने 9 अलग-अलग क्लासिकल एल्गोरिथ्मों से अपने परिणाम की तुलना की, जिसमें अनुमानित 10 व्यक्ति-वर्ष का कम्प्यूटेशनल प्रयास लगा।
लेकिन इसमें एक पेंच है: अब तक, इस विधि को केवल उन अणुओं (जैसे टोल्यून) पर लागू किया गया है जिन्हें क्लासिकल कंप्यूटरों द्वारा पहले से ही कुशलतापूर्वक अनुकरण किया जा सकता है। यह सीमा एक प्रमुख कारण है कि विशेषज्ञ, प्रभावित होने के बावजूद, सावधानी बरतने का आग्रह कर रहे हैं।
मुख्य बात 5: विशेषज्ञ सतर्क आशावाद का आग्रह करते हैं
कुछ शोधकर्ता "क्वांटम एडवांटेज" के इस दावे को लेकर सतर्क हैं। वे मानते हैं कि यह तकनीकी प्रगति प्रभावशाली है, लेकिन वे इसे एक निर्णायक जीत घोषित करने से हिचकिचा रहे हैं।
न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के ड्रीस सेल्स इस दावे पर सवाल उठाते हैं, उनका तर्क है कि इतने बड़े दावों के लिए "सबूत का बोझ अधिक होना चाहिए" और इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि इसे हल करने के लिए एक बेहतर क्लासिकल एल्गोरिथ्म मौजूद नहीं है।
डार्टमाउथ कॉलेज के जेम्स व्हिटफील्ड ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा कि यह सोचना थोड़ा जल्दबाज़ी होगी कि यह तकनीक निकट भविष्य में किसी बड़ी आर्थिक समस्या का समाधान कर देगी।
निष्कर्ष: एक सत्यापनीय कदम आगे
यह स्पष्ट है कि पूरी तरह से त्रुटि-सुधारित, बड़े पैमाने के क्वांटम कंप्यूटर अभी भी भविष्य की बात हैं। हालाँकि, गूगल का "क्वांटम इकोस" एल्गोरिथ्म व्यावहारिक अनुप्रयोगों की दिशा में एक महत्वपूर्ण और, सबसे महत्वपूर्ण बात, एक सत्यापनीय कदम का प्रतिनिधित्व करता है। यह क्वांटम गणना को केवल गति के प्रदर्शन से आगे ले जाकर एक ऐसे क्षेत्र में ले जाता है जहाँ परिणाम विश्वसनीय, दोहराए जाने योग्य और अंततः उपयोगी होते हैं।
यह हमें एक रोमांचक प्रश्न के साथ छोड़ देता है: भविष्य का 'क्वांटम-स्कोप' प्रकृति के कौन से रहस्य उजागर करेगा, नई दवाओं से लेकर नई सामग्रियों तक?
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