Big magic book gives you creativity in your life
एलिजाबेथ गिल्बर्ट की 'बिग मैजिक' से सीखें: डर को दोस्त बनाकर कैसे जिएँ एक रचनात्मक जीवन
Introduction
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप कुछ बनाना चाहते हों - एक किताब लिखना, एक पेंटिंग बनाना, या बस एक नया प्रोजेक्ट शुरू करना - लेकिन किसी अनजाने डर ने आपको रोक दिया हो? शायद आपके मन में यह ख्याल आया हो कि "मैं रचनात्मक नहीं हूँ" या "लोग क्या कहेंगे?"। अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं। यह एक बहुत ही आम एहसास है जो हमें हमारे भीतर छिपे खजानों को बाहर लाने से रोकता है।
लेकिन क्या हो अगर डर को खत्म करने के बजाय, हम उसके साथ जीना सीख लें? एलिजाबेथ गिल्बर्ट की शानदार किताब, "बिग मैजिक: क्रिएटिव लिविंग बियॉन्ड फियर" (Big Magic: Creative Living Beyond Fear), हमें यही सिखाती है। यह किताब रचनात्मकता के बारे में हमारे कई भ्रमों को तोड़ती है और हमें एक अधिक साहसी, जिज्ञासु और आनंदमय जीवन जीने के लिए प्रेरित करती है। यह लेख इस किताब के कुछ सबसे आश्चर्यजनक और प्रभावशाली विचारों को आपके सामने रखेगा।
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प्रमुख सीख
1. आपके डर को स्टीयरिंग व्हील नहीं, सिर्फ सीट बेल्ट मिलती है (Your Fear Gets a Seatbelt, Not the Steering Wheel)
गिल्बर्ट रचनात्मकता और डर के रिश्ते को समझाने के लिए एक "सड़क यात्रा" का रूपक देती हैं। कल्पना कीजिए कि आप अपनी रचनात्मकता के साथ एक लंबी यात्रा पर निकल रहे हैं। डर आपका एक अविभाज्य साथी है; वह हमेशा आपके साथ रहेगा। लक्ष्य डर को कार से बाहर निकालना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वह गाड़ी न चलाए। डर को साथ आने की अनुमति है, लेकिन उसे पिछली सीट पर बैठना होगा और उसके लिए कुछ सख़्त नियम हैं: उसे स्टीयरिंग व्हील, रेडियो, या नक्शे छूने की बिल्कुल भी इजाज़त नहीं है। उसका काम सिर्फ आपको सुरक्षित महसूस कराना है, निर्णय लेना नहीं।
यह विचार इसलिए शक्तिशाली है क्योंकि यह "निडर" होने के दबाव को हटा देता है। आपको रचनात्मक काम शुरू करने से पहले डर पर विजय पाने की ज़रूरत नहीं है। आपको बस डर को उसकी सही जगह दिखानी है और उसे अपने फैसले नियंत्रित करने से रोकना है।
"डर एक उजाड़ कब्रिस्तान है जहाँ हमारे सपने तेज धूप में सूखने के लिए चले जाते हैं।"
2. विचार जीवित हैं (और अगर आप ध्यान न दें तो वे चले जाते हैं) (Ideas Are Alive (and They'll Leave You if You Don't Pay Attention))
गिल्बर्ट का एक अद्भुत और जादुई विचार है कि आइडिया यानी विचार, अपने आप में जीवित और ऊर्जावान शक्तियाँ हैं। वे ब्रह्मांड में बेचैन आत्माओं की तरह तैरते रहते हैं, एक मानवीय साथी की तलाश में जो उन्हें इस दुनिया में साकार कर सके। जब कोई विचार आपको चुनता है, तो वह आपका ध्यान आकर्षित करने की पूरी कोशिश करता है।
गिल्बर्ट अपनी इस थ्योरी का एक अद्भुत और रहस्यमयी सबूत भी देती हैं। उन्हें अमेज़ॅन के जंगलों पर आधारित एक उपन्यास का शानदार विचार आया था, लेकिन किसी कारणवश उनका ध्यान भटक गया और उन्होंने उस पर काम नहीं किया। कुछ समय बाद, वह अपनी दोस्त, लेखिका एन पैचेट (Ann Patchett) से मिलीं। बातचीत में पैचेट ने बताया कि वह एक नए उपन्यास पर काम कर रही हैं। जब उन्होंने कहानी सुनाई, तो गिल्बर्ट के रोंगटे खड़े हो गए - यह वही कहानी थी, अमेज़ॅन के जंगलों पर आधारित, जो उनके मन में आई थी। गिल्बर्ट मानती हैं कि जब उस विचार ने देखा कि वह उस पर ध्यान नहीं दे रही हैं, तो वह निराश होकर एन पैचेट के पास चला गया, जिसने उसे साकार किया और वह उपन्यास स्टेट ऑफ़ वंडर (State of Wonder) के नाम से प्रकाशित हुआ।
यह विचार हमारी जिम्मेदारी को बदल देता है। यह सिर्फ "विचार सोचने" के बारे में नहीं है, बल्कि जब प्रेरणा दस्तक दे, तो उसके प्रति खुला और उत्तरदायी होने के बारे में भी है। यदि आप उस विचार को नज़रअंदाज़ करते हैं, तो वह निराश होकर किसी और सहयोगी की तलाश में आगे बढ़ जाएगा।
"जब किसी विचार को लगता है कि उसे कोई मिल गया है - मान लीजिए, आप - जो उसे दुनिया में ला सकता है, तो वह विचार आपके पास आता है। वह आपका ध्यान खींचने की कोशिश करेगा।"
3. "जुनून" को छोड़ें, "जिज्ञासा" का पीछा करें (Ditch "Passion," Follow "Curiosity")
हमें अक्सर सलाह दी जाती है कि "अपने जुनून का पीछा करो।" लेकिन कई लोगों के लिए, यह एक बहुत बड़ा और डरावना काम हो सकता है। क्या होगा अगर आपको पता ही नहीं है कि आपका जुनून क्या है? गिल्बर्ट इसका एक सरल और कोमल विकल्प देती हैं: अपनी जिज्ञासा का पीछा करें।
यह सलाह इसलिए इतनी प्रभावशाली है क्योंकि जिज्ञासा में दबाव कम होता है। जुनून एक बड़ी प्रतिबद्धता की मांग करता है, जबकि जिज्ञासा बस एक हल्की सी दिलचस्पी पूछती है। क्या कोई ऐसी चीज़ है जो आपको थोड़ी सी भी दिलचस्प लगती है? उसका पीछा करें। यह आपको अप्रत्याशित और अद्भुत जगहों पर ले जा सकती है, और शायद रास्ते में आपको आपका जुनून भी मिल जाए। यह रचनात्मक यात्रा को एक भव्य, डरावनी खोज के बजाय एक मजेदार खजाने की खोज जैसा बना देता है।
"जिज्ञासा का दांव भी जुनून के दांव से कहीं कम होता है। जिज्ञासा केवल एक सरल प्रश्न पूछती है: क्या कोई ऐसी चीज है जिसमें आपकी रुचि है? कुछ भी? थोड़ा सा भी?"
4. अपनी दिन की नौकरी बनाए रखें (Keep Your Day Job)
यह सलाह थोड़ी अटपटी लग सकती है, लेकिन गिल्बर्ट जोर देकर कहती हैं कि अपनी रचनात्मकता पर अपने बिलों का भुगतान करने का बोझ न डालें, खासकर शुरुआती दिनों में। उन्होंने खुद तीन किताबें लिखने तक अपनी नौकरी जारी रखी थी।
इसके पीछे एक गहरा ज्ञान छिपा है। जब आप अपनी कला पर पैसा कमाने का दबाव डालते हैं, तो उसका आनंद खत्म हो सकता है और वह तनाव का स्रोत बन सकती है। एक नौकरी आपको वित्तीय सुरक्षा देती है, जिससे आपकी रचनात्मकता खेल, स्वतंत्रता और शुद्ध आनंद का एक सुरक्षित स्थान बनी रहती है। आप बिना किसी दबाव के बना सकते हैं, सिर्फ बनाने की खुशी के लिए।
"नौकरी करने में कोई अपमान नहीं है। अपमानजनक तो यह है कि आप अपनी रचनात्मकता को यह मांग कर डरा दें कि वह आपके पूरे अस्तित्व का खर्च उठाए।"
5. "अच्छा होने से बेहतर है पूरा होना" ("Done is Better Than Good")
पूर्णतावाद (Perfectionism) रचनात्मकता का सबसे बड़ा दुश्मन है। गिल्बर्ट इसे "डर का एक महंगा, हाई-फ़ैशन वाला रूप" कहती हैं। यह एक जाल है जो हमें काम शुरू करने या, अक्सर, उसे खत्म करने से रोकता है। हम हमेशा सोचते रहते हैं कि यह "अभी तक सही नहीं है।"
"अच्छा होने से बेहतर है पूरा होना" का मंत्र इस जाल से निकलने की चाबी है। किसी प्रोजेक्ट को पूरा करना, भले ही वह अपूर्ण हो, अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। यह आपको गति देता है, अनुभव सिखाता है, और आपको उन गिने-चुने लोगों की श्रेणी में रखता है जो वास्तव में अपना काम पूरा करते हैं। यह मंत्र उस "दुखी कलाकार" (tortured artist) की रोमांटिक लेकिन विनाशकारी धारणा के बिल्कुल विपरीत है, जो पूर्णता की पीड़ा में डूबा रहता है। गिल्बर्ट का दृष्टिकोण बनाने की प्रक्रिया में खुशी और निरंतरता खोजने के बारे में है, जिसे पूर्णतावाद सीधे तौर पर खत्म कर देता है।
जैसा कि लेखिका रेबेका सोल्निट कहती हैं, जिसे गिल्बर्ट अपनी किताब में उद्धृत करती हैं:
"'उत्तम' न केवल 'अच्छे' का दुश्मन है; यह यथार्थवादी, संभव और मजेदार का भी दुश्मन है।"
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Conclusion
"बिग मैजिक" का मूल संदेश यह है कि एक रचनात्मक जीवन जीना किसी प्रतिभाशाली या दुखी कलाकार का विशेषाधिकार नहीं है। यह हर उस व्यक्ति के लिए उपलब्ध है जो डर के बावजूद साहस, जिज्ञासा और बनाने के आनंद को अपनाने के लिए तैयार है। यह एक ऐसा रास्ता है जो हमारे जीवन को अधिक जीवंत और सार्थक बना सकता है।
तो, अब आपसे एक सवाल है: क्या आप उन खजानों को बाहर लाने का साहस रखते हैं जो आपके भीतर छिपे हैं?
#BigMagic
