Courage to be dislike book summary and explanation review
खुशी का वह रहस्य जो आपको चौंका देगा: 'द करेज टू बी डिस्लाइक्ड' से 5 क्रांतिकारी सबक
क्या आपको कभी ऐसा महसूस होता है कि आपका अतीत आपकी वर्तमान सीमाओं की जंजीर बन गया है? क्या आप अपनी पुरानी यादों या किसी 'आघात' (Trauma) के बोझ तले दबे हुए हैं और मानते हैं कि आपकी आज की स्थिति के लिए बीता हुआ कल जिम्मेदार है?
इचिरो किशमी और फुमिताके कोगा की प्रसिद्ध पुस्तक 'द करेज टू बी डिस्लाइक्ड' (The Courage to Be Disliked) हमें एक ऐसा नजरिया देती है जो पहली बार सुनने में कड़वा लग सकता है, लेकिन गहराई में उतरने पर यह पूरी तरह मुक्त कर देने वाला है। यह पुस्तक अल्फ्रेड एडलर के मनोविज्ञान पर आधारित एक दार्शनिक और एक युवक के बीच का संवाद है। एक मनोवैज्ञानिक के रूप में, मैं इसे केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि आत्म-सुधार का एक शक्तिशाली घोषणापत्र मानता हूँ। आइए, उन 5 क्रांतिकारी सबकों को समझते हैं जो आपकी खुशियों के प्रति नजरिए को हमेशा के लिए बदल सकते हैं।
1. आपका अतीत आपकी नियति नहीं है (Teleology vs. Etiology)
ज्यादातर लोग 'एटियलजी' (Etiology) यानी 'कारण-प्रभाव' के सिद्धांत में जीते हैं। वे मानते हैं कि "मेरे साथ बचपन में यह हुआ, इसलिए मैं आज ऐसा हूँ।" लेकिन एडलर का तर्क हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने अतीत से निर्धारित नहीं होते। वे 'टेलियोलॉजी' (Teleology) या 'उद्देश्य-वाद' की बात करते हैं।
एडलर के अनुसार, हम अपने अनुभवों से नहीं, बल्कि उन अनुभवों को दिए गए 'अर्थ' से निर्धारित होते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति खुद को कमरे में बंद रखता है (Shut-in), तो एडलर यह नहीं पूछते कि "किस कारण" से वह अंदर है। वे पूछते हैं कि उसका "लक्ष्य" क्या है? अक्सर, ऐसे व्यक्ति का लक्ष्य माता-पिता का विशेष ध्यान (Special treatment) प्राप्त करना होता है। बाहर न जाकर वह इस बात से भी बच जाता है कि उसे समाज की उस भीड़ का हिस्सा बनना पड़ेगा जहाँ वह सिर्फ एक साधारण चेहरा (Faceless mass) बनकर रह जाएगा। यहाँ 'मनोविज्ञान' यह है कि व्यक्ति ने अपनी वर्तमान स्थिति को एक उद्देश्य के लिए चुना है।
"कोई भी अनुभव अपने आप में हमारी सफलता या विफलता का कारण नहीं है। हम अपने अनुभवों के झटके—तथाकथित आघात—से पीड़ित नहीं होते हैं, बल्कि हम उनमें से वह बनाते हैं जो हमारे उद्देश्यों के अनुकूल होता है।"
2. क्रोध और भावनाएं केवल उपकरण हैं (Emotions as Tools)
यह विचार अक्सर पाठकों को चौंका देता है कि भावनाएं अनियंत्रित आवेग नहीं हैं। एडलर के अनुसार, हम भावनाओं को 'पैदा' करते हैं ताकि हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
पुस्तक में युवक एक वेटर का उदाहरण देता है जिसने उसके कपड़ों पर कॉफी गिरा दी और युवक उस पर चिल्ला उठा। युवक को लगा कि उसका गुस्सा एक स्वाभाविक 'प्रतिक्रिया' थी। लेकिन दार्शनिक ने यह रहस्य खोला कि युवक ने चिल्लाने के 'लक्ष्य' को पूरा करने के लिए क्रोध का एक 'उपकरण' के रूप में इस्तेमाल किया ताकि वह वेटर पर हावी हो सके और उसे अपनी बात मनवा सके।
इसी तरह, एक माँ अपनी बेटी पर चिल्लाती है, लेकिन फोन बजते ही उसकी आवाज विनम्र हो जाती है। फोन रखते ही वह फिर से चिल्लाने लगती है। इसका मतलब है कि माँ गुस्से के वश में नहीं थी; वह अपनी बेटी को नियंत्रित करने के लिए गुस्से का इस्तेमाल कर रही थी। जब हम भावनाओं को 'चुनाव' के रूप में देखने लगते हैं, तो हमारे पास उन्हें बदलने की असली शक्ति आ जाती है।
"क्रोध एक उपकरण है जिसे आवश्यकतानुसार बाहर निकाला जा सकता है... मां गुस्से में चिल्ला नहीं रही है जिसे वह नियंत्रित नहीं कर सकती। वह अपनी बेटी पर हावी होने के लिए गुस्से का इस्तेमाल कर रही है।"
3. सभी समस्याएं 'पारस्परिक संबंध' की समस्याएं हैं (All Problems are Interpersonal)
एडलर का यह दावा बहुत साहसी है कि यदि इस दुनिया में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होता, तो कोई समस्या भी नहीं होती। हमारी अधिकांश चिंताएं दूसरों से तुलना करने से पैदा होती हैं। एडलर कहते हैं कि खुशी कोई 'वस्तुनिष्ठ' (Objective) स्थिति नहीं है, बल्कि एक 'व्यक्तिपरक' (Subjective) निर्णय है।
इसे 'कुएं के पानी' वाले उदाहरण से समझें। कुएं के पानी का तापमान हमेशा 60 डिग्री (वस्तुनिष्ठ तथ्य) रहता है। लेकिन गर्मियों में वह ठंडा और सर्दियों में गर्म महसूस होता है। यह पानी का नहीं, आपके अनुभव का गुण है। इसी तरह, 'हीनता की भावना' (Feeling of Inferiority) भी व्यक्तिपरक है। यह भावना बुरी नहीं है; यह आगे बढ़ने के लिए 'लॉन्च पैड' हो सकती है। समस्या तब होती है जब इसे 'हीनता ग्रंथि' (Inferiority Complex) बना लिया जाता है—यानी अपनी कमियों को एक बहाने के रूप में इस्तेमाल करना ताकि प्रयास न करना पड़े।
4. 'लाइफ-लाई' (जीवन का झूठ) और खुश रहने का साहस
हम अक्सर अपनी नाखुशी के लिए दूसरों को या अपनी परिस्थितियों को दोष देते हैं। एडलर इसे 'लाइफ-लाई' कहते हैं। सुकरात के एक प्रसिद्ध विरोधाभास के अनुसार, "कोई भी बुराई की इच्छा नहीं करता।" यहाँ 'बुराई' का अर्थ 'हानिकारक' है और 'अच्छाई' (Agathon) का अर्थ 'फायदेमंद' है। जो लोग नाखुश रहना चुनते हैं, वे भी ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि नाखुश रहना उनके लिए किसी तरह 'फायदेमंद' है।
बदलाव न करने के पीछे एडलर 'पुरानी कार' का उदाहरण देते हैं। भले ही आपकी वर्तमान जीवनशैली (Lifestyle) एक पुरानी, खड़खड़ाती कार की तरह हो जिसमें कई दिक्कतें हैं, फिर भी आप इसे चलाना जानते हैं। नई जीवनशैली चुनना एक नई कार की तरह है जिसे चलाना आप नहीं जानते—वहाँ अनिश्चितता का डर है। बदलाव के लिए क्षमता की नहीं, बल्कि साहस की कमी होती है। एडलर का मनोविज्ञान 'अधिकार' (Possession) का नहीं, बल्कि 'उपयोग' (Use) का मनोविज्ञान है। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप किसके साथ पैदा हुए, बल्कि यह है कि आप अपने पास मौजूद उपकरणों का उपयोग कैसे करते हैं।
"आपकी नाखुशी के लिए आपके अतीत या आपके पर्यावरण को दोष नहीं दिया जा सकता। और ऐसा नहीं है कि आपमें क्षमता की कमी है। आपमें बस साहस की कमी है।"
5. जीवन कोई प्रतियोगिता नहीं है (Life is Not a Competition)
जब हम जीवन को एक प्रतियोगिता मानते हैं, तो हर व्यक्ति हमारा 'दुश्मन' बन जाता है। दूसरों की सफलता हमें अपनी हार लगने लगती है। एडलर सिखाते हैं कि 'श्रेष्ठता की खोज' का अर्थ दूसरों से ऊपर चढ़ना नहीं है, बल्कि अपने 'आदर्श स्व' (Ideal Self) की ओर एक कदम बढ़ाना है।
यदि हम प्रतियोगिता की मानसिकता छोड़ दें, तो हमारे आस-पास के लोग 'प्रतिद्वंद्वी' के बजाय हमारे 'कॉमरेड' (साथी) बन जाते हैं। एक मनोवैज्ञानिक के रूप में, मैं इसे सबसे बड़ी बाधा मानता हूँ—जिस दिन आप दूसरों से अपनी तुलना बंद कर देते हैं, उसी क्षण से आप वास्तव में स्वतंत्र हो जाते हैं।
निष्कर्ष: 'अभी और यहीं' जीने का संकल्प
यह पूरी चर्चा हमें एक ही बिंदु पर लाती है: दुनिया सरल है और जीवन भी, बस हम इसे अपने विचारों से जटिल बनाते हैं। एडलर का संदेश स्पष्ट है—आपका जीवन 'अभी और यहीं' (Here and Now) निर्धारित होता है। अतीत का अब कोई अस्तित्व नहीं है और भविष्य अभी आया नहीं है। आप अपनी 'जीवनशैली' को आज इसी वक्त बदल सकते हैं, यदि आपमें 'नापसंद किए जाने का साहस' और 'खुश रहने का साहस' हो।
अंत में, खुद से यह गहरा सवाल पूछें: "यदि आपका अतीत आपको परिभाषित नहीं करता है और आपके पास अपने उपकरणों को इस्तेमाल करने की पूरी आजादी है, तो आप आज इसी वक्त अपने लिए कौन सा नया लक्ष्य चुनेंगे?"
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