Breaking Night: A Memoir of Forgiveness, Survival, and My Journey from Homeless to Harvard by Liz Murray explain summary and review
टूथपेस्ट से हार्वर्ड तक: लिज़ मरे के जीवन से 5 मार्मिक और प्रेरक सबक 1980 के दशक का ब्रोंक्स (Bronx)—नशीले पदार्थों की महामारी, एड्स (AIDS) का खौफनाक साया और 'वॉर ऑन ड्रग्स' की विभीषिका के बीच लिज़ मरे का बचपन बीत रहा था। न्यूयॉर्क की कड़कड़ाती ठंड में सबवे ट्रेनों के 'D' कोच में रातें काटना, सीढ़ियों के कोनों में सोना और भूख की तड़प मिटाने के लिए चेरी फ्लेवर वाले लिपस्टिक या टूथपेस्ट को साझा करना—यह लिज़ की किशोरावस्था की वह नग्न वास्तविकता थी, जिसे सुनकर रूह कांप जाती है। लिज़ की आत्मकथा का शीर्षक है 'ब्रेकिंग नाइट' (Breaking Night) , जो न्यूयॉर्क की गलियों का एक मुहावरा है—जिसका अर्थ है पूरी रात जागकर सूरज के निकलने का इंतज़ार करना। लिज़ ने न केवल उन काली रातों को झेला, बल्कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय तक पहुँचकर सफलता का वह सूरज भी देखा जो नामुमकिन प्रतीत होता था। एक विशेषज्ञ सामाजिक विश्लेषक और लेखक के रूप में, मैं लिज़ के जीवन को केवल एक 'दुखद कहानी' नहीं, बल्कि मानव चेतना की अदम्य शक्ति के एक केस स्टडी के रूप में देखता हूँ। यहाँ उनके जीवन से प्राप्त...