Thomas Kuhn’s Paradigm Shift Explained: How Scientific Revolutions Really Work
विज्ञान की प्रगति के बारे में हमारी सोच गलत क्यों है: थॉमस कुह्न के 5 क्रांतिकारी विचार अक्सर हम विज्ञान को एक ऐसी सीधी और साफ-सुथरी प्रक्रिया के रूप में देखते हैं जहाँ ज्ञान ईंट-दर-ईंट जमा होता रहता है। हम मानते हैं कि वैज्ञानिक पुराने तथ्यों के ऊपर नए तथ्य रखते जाते हैं और इस तरह हम धीरे-धीरे 'परम सत्य' की ओर बढ़ते हैं। लेकिन क्या होगा अगर मैं आपसे कहूँ कि विज्ञान की यह छवि एक सुंदर झूठ है? 1962 में थॉमस कुह्न (Thomas Kuhn) की कालजयी पुस्तक 'द स्ट्रक्चर ऑफ साइंटिफिक रिवोल्यूशन' (The Structure of Scientific Revolutions) ने इस धारणा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। एक भौतिक विज्ञानी से इतिहासकार बने कुह्न ने दुनिया को बताया कि विज्ञान की प्रगति 'वीरतापूर्ण संचय' नहीं, बल्कि 'हिंसक वैचारिक क्रांतियों' का परिणाम है। यह पुस्तक केवल विज्ञान के बारे में नहीं है; यह एक समाजशास्त्रीय प्रहार है जो बताता है कि हम सत्य को कैसे 'निर्मित' करते हैं। यहाँ कुह्न के वे 5 क्रांतिकारी विचार दिए गए हैं, जो विज्ञान के प्रति आपकी समझ को बुनियादी रूप से बदल देंगे: 1. विज...