India's AI submit 2026 highlights overview and explanation
भारत की AI क्रांति: 2026 समिट से 5 सबसे चौंकाने वाले और महत्वपूर्ण निष्कर्ष
कल्पना कीजिए एक ऐसे भारत की, जहाँ डेटा केवल 'तेल' नहीं, बल्कि हर नागरिक की उन्नति के लिए 'ऑक्सीजन' के समान सुलभ है। भारत आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसके पास दुनिया का सबसे विशाल डेटा भंडार और सबसे युवा आबादी (65% आबादी 35 वर्ष से कम) का अद्वितीय संगम है। नई दिल्ली के 'भारत मंडपम' में संपन्न हुए 'India AI Impact Summit 2026' और 'Global INDIAai Summit' केवल चर्चा के मंच नहीं थे, बल्कि वे 'विकसित भारत 2047' के निर्माण का एक सुदृढ़ डिजिटल ब्लूप्रिंट बनकर उभरे हैं।
एक भविष्यवादी नीति विशेषज्ञ के रूप में, मैं इस समिट से निकले उन 5 क्रांतिकारी निष्कर्षों का विश्लेषण कर रहा हूँ, जो यह सिद्ध करते हैं कि भारत अब तकनीक का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि विश्व का 'AI पावरहाउस' बन चुका है।
1. ₹100 में सुपरकंप्यूटिंग – 'एआई का लोकतंत्रीकरण' (Democratization of AI)
समिट का सबसे चौंकाने वाला मोड़ 'IndiaAI Mission' के तहत कंप्यूटिंग पावर की लागत में अभूतपूर्व कमी है। कल्पना कीजिए एक ऐसे राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की, जो इतना शक्तिशाली है कि वह ओपन-सोर्स मॉडल 'DeepSeek' से नौ गुना अधिक और 'ChatGPT' की कुल क्षमता का लगभग दो-तिहाई हिस्सा संभाल सकता है।
- 18,693 GPUs का महा-शक्तिशाली क्लस्टर: भारत 18,693 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) से लैस एक विशाल कंप्यूटिंग सुविधा विकसित कर रहा है। यह बुनियादी ढांचा वैश्विक टेक दिग्गजों के एकाधिकार को सीधी चुनौती देता है।
- रियायती दरें: जहाँ वैश्विक स्तर पर GPU एक्सेस की लागत $2.5 से $3 (लगभग ₹210-₹250) प्रति घंटा है, वहीं भारत सरकार इसे केवल ₹100 प्रति घंटे की दर पर उपलब्ध करा रही है।
- प्रभाव: यह कदम छोटे स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं के लिए 'लेवल प्लेइंग फील्ड' तैयार कर रहा है, जिससे नवाचार अब केवल अमीर कॉर्पोरेशन्स तक सीमित नहीं रहेगा।
"हमारा संकल्प AI को 'Accessible to All' (सभी के लिए सुलभ) बनाना है, ताकि सामाजिक-आर्थिक स्थिति किसी भी भारतीय के नवाचार के रास्ते में बाधा न बन सके।" — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
2. दुनिया में नंबर 1 – ग्लोबल AI स्किल पेनिट्रेशन
किंतु, यह किफायती कंप्यूटिंग पावर तब तक निरर्थक है जब तक उसे चलाने वाले कुशल हाथ न हों। समिट ने 'Stanford AI Index 2024' के उन आंकड़ों को रेखांकित किया है जो भारत को वैश्विक स्तर पर एक 'ह्यूमन कैपिटल हब' के रूप में स्थापित करते हैं।
- वैश्विक स्कोर कार्ड: भारत 2.8 के स्कोर के साथ 'AI स्किल पेनिट्रेशन' में दुनिया में शीर्ष पर है, जो अमेरिका (2.2) और जर्मनी (1.9) जैसे विकसित देशों से कहीं आगे है।
- महिला शक्ति का उदय: भारत महिलाओं की AI भागीदारी में भी दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। भारत का स्कोर 1.7 है, जो अमेरिका (1.2) और इज़राइल (0.9) की तुलना में भारत की समावेशी प्रगति को दर्शाता है।
- एकाग्रता में वृद्धि: 2016 के बाद से भारत में AI टैलेंट की एकाग्रता में 263% की वृद्धि हुई है। भारत अब केवल दुनिया का 'बैक ऑफिस' नहीं, बल्कि उसका 'AI ब्रेन' बन रहा है।
3. 'ऑरेंज इकोनॉमी' और 20 लाख नए रोजगार का सृजन
अक्सर यह मिथक प्रचारित किया जाता है कि AI नौकरियां छीन लेगा, लेकिन समिट ने इसके विपरीत एक नई 'ऑरेंज इकोनॉमी' (Orange Economy) का खाका पेश किया है। यह क्षेत्र रचनात्मकता और तकनीक के संगम—एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC)—पर केंद्रित है।
- आर्थिक विशालता: 'Wheebox' की इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत का AI उद्योग 2025 तक 28.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का होने का अनुमान है, जो 45% की वार्षिक दर (CAGR) से बढ़ रहा है।
- संस्थागत आधार: बजट 2026-27 के तहत भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT), मुंबई के सहयोग से देश के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में 'Content Creator Labs' स्थापित की जा रही हैं।
- रोजगार की गारंटी: इस पहल से 2030 तक लगभग 20 लाख नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जो छात्रों को भविष्य के कौशल से लैस कर उन्हें सीधे बाजार से जोड़ेंगे।
4. डिजिटल संप्रभुता – अपनी भाषा, अपना AI (BharatGen & Bhashini)
भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में AI की सफलता उसकी भाषाई संप्रभुता (Linguistic Sovereignty) पर निर्भर है। समिट में स्वदेशी मॉडल्स की शक्ति का प्रदर्शन किया गया, जो भारत के 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) की रीढ़ हैं।
- Sarvam-1 और Hanooman: समिट में 'Sarvam-1' मॉडल को पेश किया गया, जो 2 बिलियन पैरामीटर्स (2 Billion Parameters) वाला एक शक्तिशाली मॉडल है और 10 प्रमुख भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है। वहीं, 'Hanooman' का लक्ष्य 35 से 90 भाषाओं तक विस्तार करना है।
- भारतजेन (BharatGen): यह दुनिया का पहला सरकारी वित्त पोषित 'मल्टीमॉडल LLM' है, जो भाषा, आवाज और दृष्टि के माध्यम से सरकारी सेवाओं को आम आदमी तक पहुँचाएगा।
- महाकुंभ 2025 का उदाहरण: समिट में बताया गया कि कैसे 'भाषिणी' संचालित 'कुंभ सहा’AI’यक' चैटबॉट ने रीयल-टाइम अनुवाद और आवाज आधारित सहायता प्रदान कर दुनिया के सबसे बड़े जनसमूह के प्रबंधन को संभव बनाया।
5. 'प्रैग्मैटिक रेगुलेशन' – नवाचार और नैतिकता का संतुलन
भारत ने AI नियमन के लिए एक 'टेक्नो-लीगल' (Techno-legal) दृष्टिकोण अपनाया है, जो ग्लोबल साउथ के लिए एक आदर्श मॉडल है। भारत का उद्देश्य 'ओवर-रेगुलेशन' और 'मोनोपोली' (एकाधिकार) दोनों से बचना है।
- वैश्विक नेतृत्व: भारत 2024 में GPAI (Global Partnership on Artificial Intelligence) का 'Lead Chair' है। इस भूमिका में भारत वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय और मानव-केंद्रित AI के लिए मानदंड तय कर रहा है।
- तकनीकी सुरक्षा कवच: भारत केवल कानूनों पर निर्भर नहीं है; सरकार IITs के साथ मिलकर 'डीपफेक' (Deepfakes), साइबर सुरक्षा और गोपनीयता जोखिमों से निपटने के लिए उन्नत तकनीकी समाधान विकसित करने में निवेश कर रही है।
- समावेशी मॉडल: भारत का दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि AI के लाभ केवल कुछ कंपनियों तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का माध्यम बनें।
निष्कर्ष: भविष्य की पुकार
2026 की यह समिट स्पष्ट उद्घोषणा करती है कि भारत का 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' ही उसकी AI रणनीति का असली ईंधन है। हम केवल तकनीक का निर्माण नहीं कर रहे, बल्कि एक ऐसा भविष्य बुन रहे हैं जहाँ AI एक किसान की फसल सुधारने से लेकर एक छात्र के करियर की दिशा तय करने तक—हर जगह मौजूद होगा।
अंतिम विचार: क्या हम उस भविष्य के लिए तैयार हैं जहाँ तकनीक केवल कुछ विशेष वर्ग की जागीर नहीं, बल्कि हर भारतीय के हाथ में सशक्तिकरण का सबसे बड़ा माध्यम होगी? समिट के ये निष्कर्ष बताते हैं कि वह भविष्य अब हमारे द्वार पर दस्तक दे रहा है।
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